वक़्त कि आतिशें जब भी दिल जलाती हैं, तेरी याद आती है,
उम्मीदों कि ठण्डी हवाएं फिर दिल को सहलाती है, जब तेरी याद आती है।
तेरी खामोशियों मे छुपा तेरा प्यार है,
गम क्या जो तुने ना जताया कभी,
मेरी ख़ुशी तेरी आंखों मे शुमार है,
गम क्या तेरे होंठों ने ना बताया कभी,
तेरी खामोशियाँ तेरी यादों के गीत गाती हैं, जब तेरी याद आती है
अभी तक सहेज कर रखीं हैं मैंने,
अपने बचपन की वो खुबसुरत यादें,
वो साथ उठना, खाना-पीना वो सोना,
वो माँ की प्यार भरी थपकियों सी रातें
हर सुबह फिर उन सुबहों कि याद दिलाती है, जब तेरी याद आती है
कहाँ भूला हूँ मैं तेरे साथ का बिछोना,
अभी याद है मुझे मेरा तकिये के लिए रोना,
पर आह! तेरा साथ क्या था इक दुनिया थी मेरी,
मेरी निगाहें भी सदा थी तुमको ही ढूंढती,
ये निगाहें आज भी तुमको ही ढूंढें जाती है, जब तेरी याद आती है
रहे शिकवा शिक़ायत यूं तो दर्मयां हमारे,
पर अपने लफ्जों से मेरा दिल ना दुखाया कभी,
मेरे सितम दर्ज हैं कई पीठ पर तुम्हारे,
तुमने पर हाथ ना उठाया कभी,
आजा कि इस सितमगर को भी ये तन्हाईयाँ सताती हैं, जब तेरी याद आती है
इस हुजूम मे थे यूं तो कितने हमसाये,
अपनों मे मगर एक तुम ही नज़र आये,
देख, जवां हो लिए तुमसे जुदा ही रहके,
आजा कि तुम्हे मिले बिना ही उमर गुजर ना जाये,
ये सांसे तेरे आने कि राह देखे जाती हैं , बस तेरी याद याद आती है
उम्मीदों की ठण्डी हवाएं दिल को सहलाती हैं, जब तेरी याद आती है ।
Tuesday, August 21, 2007
मेरे भैया
Posted by विजय स्वामी at 7:05 AM
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