जिन्दंगी में बाबु तुमसा हमसफ़र कहाँ मिलेगा
मोहब्बत लबों पे, जुबाँ में इतना असर कहाँ मिलेगा
तेरी निगाहों से रोशन हैं राह -ऐ -जिन्दंगी मेरी
मेरी तमन्न्नाओ को तुमसे बेहतर घर कहाँ मिलेगा
Saturday, April 4, 2009
प्रिय बाबु- आपके लिए
Posted by विजय स्वामी at 3:05 AM 0 comments
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